कविता झा, अध्यक्ष, जन सरोकार
रांची सदर अस्पताल की ऐतिहासिक ‘लाल बिल्डिंग’ देश का पहला वूमेन हॉस्पिटल (महिला अस्पताल) नहीं है, हालांकि यह तत्कालीन छोटानागपुर क्षेत्र का पहला समर्पित महिला एवं प्रसूति चिकित्सालय जरूर था. भारत का पहला समर्पित महिला अस्पताल होने का गौरव चेन्नई (मद्रास) के ‘कस्तूरबा गांधी अस्पताल’ (स्थापना 1885) को प्राप्त है.
स्थापना व निर्माण : इस दो मंजिला ऐतिहासिक भवन का निर्माण ब्रिटिश काल में वर्ष 1928 से 1930 के बीच कराया गया था.
जमीन दान : इसके निर्माण के लिए मशहूर उद्योगपति राजा बलदेव दास बिड़ला ने लगभग 210 एकड़ की विशाल भूमि दान में दी थी.
पुराना नाम : शुरुआत में इसे ब्रिटिश भारत के वायसराय की पत्नी के नाम पर लेडी इरविन वूमेंस हॉस्पिटल कहा गया. बाद में बिड़ला परिवार के योगदान के कारण यह बिड़ला वूमेंस हॉस्पिटल के नाम से बेहद लोकप्रिय हुआ.
वास्तुकला : यह प्राचीन भवन चूना, सुर्खी (लाल ईंट), गुड़ का शीरा, मेथी और उड़द के पानी के पारंपरिक मिश्रण से बना है, जिसकी दीवारें 40 इंच तक मोटी हैं.
और इसे डॉक्टर प्रभात कुमार ने सुपर मॉडल अस्पताल बनाया
इसका उद्घाटन किसने किया ? : ब्रिटिश भारत के तत्कालीन वायसराय और गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन के वर्ष 1928 में रांची आगमन के दौरान इस अस्पताल की आधारशिला रखी गई थी. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वर्ष 1933 में आधिकारिक तौर पर इसका उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित किया गया.
उस समय यह कितने बेड का था ? : ब्रिटिश काल के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, शुरुआती दौर में यह केवल 20 से 30 बेड की क्षमता वाला एक छोटा अस्पताल था, जिसे विशेष रूप से गरीब और जनजातीय महिलाओं को सुरक्षित प्रसव (मटेरनिटी) और इलाज की सुविधा देने के लिए शुरू किया गया था.
राजा बलदेव दास बिड़ला ने रखी थी आधारशिला
इस हॉस्पिटल का निर्माण तत्कालीन गवर्नर जनरल लाॅर्ड इरविन के रांची आगमन को लेकर राजा बलदेव दास बिड़ला ने कराया था. 1928 में इसकी आधारशिला रखी थी. निर्माण के पांचवें वर्ष यानी 09 अक्तूबर 1933 को समारोह आयोजित कर इस अस्पताल को यहां के आम लोगों को समर्पित कर दिया गया. मालूम हो कि 1928 में इरविन के कार्यकाल में ही सात सदस्यीय साइमन कमीशन का दल मुंबई पहुंचा था. महात्मा गांधी की दांडी यात्रा भी इरविन के कार्यकाल में ही हुई थी.


