भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संकेत दिया है कि देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी INS अरिदमन जल्द ही भारतीय नौसेना में शामिल हो सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक है—अरिदमन।”
सूत्रों के अनुसार, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से लैस यह पनडुब्बी भारत की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक शक्ति को और मजबूत करेगी। यह देश के परमाणु सिद्धांत के तहत मारक क्षमता और सर्वाइवल क्षमता दोनों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। यह घोषणा उनके विशाखापत्तनम दौरे के दौरान सामने आई, जहां वे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ को भी नौसेना में शामिल करने वाले हैं।
बताया जा रहा है कि INS अरिदमन ने अपने समुद्री परीक्षणों का अंतिम चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और अब यह स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड में शामिल होने के लिए तैयार है। यह पनडुब्बी INS अरिहंत और INS अरिघात के बाद इस श्रृंखला की अगली कड़ी है।
करीब 7,000 टन वजनी यह पनडुब्बी अपनी पिछली पीढ़ी की तुलना में अधिक उन्नत मानी जा रही है। इसमें बेहतर स्टील्थ और ध्वनिक प्रदर्शन के लिए आधुनिक डिजाइन का उपयोग किया गया है। इसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित 83 मेगावाट के प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर से संचालित किया जाता है।
खास बात यह है कि INS अरिदमन में आठ वर्टिकल लॉन्च ट्यूब्स हैं, जो इसे एक साथ 3,500 किमी तक मार करने वाली K-4 मिसाइलें या 750 किमी रेंज की K-15 मिसाइलें ले जाने में सक्षम बनाती हैं। इससे भारत की समुद्र में निरंतर परमाणु गश्त की क्षमता और मजबूत होगी, जिससे हर समय एक परमाणु-सक्षम पनडुब्बी तैनात रह सकेगी।
पिछले वर्ष नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी संकेत दिया था कि यह पनडुब्बी अप्रैल-मई के बीच नौसेना में शामिल हो सकती है। अब इसके अंतिम परीक्षण पूरे होने के बाद इसकी औपचारिक तैनाती का रास्ता साफ माना जा रहा है।

