आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर अपने सांसद राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटाने की सिफारिश की है। साथ ही पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि उन्हें अब सदन में पार्टी की ओर से बोलने का अवसर न दिया जाए, जिससे उनके बोलने के समय में कटौती हो सकती है।
इस फैसले के बाद राघव चड्ढा ने बिना नाम लिए पार्टी पर इशारों में निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में राघव चड्ढा संसद में कई जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे थे। उन्होंने एयरपोर्ट पर महंगी चाय का मुद्दा उठाया था, जहां 10 रुपये की चाय की कीमत को लेकर सवाल खड़े किए गए। इसके अलावा डिलीवरी बॉयज की स्थिति और उनके अधिकारों को लेकर भी उन्होंने सदन में आवाज उठाई थी।
इतना ही नहीं, उन्होंने पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) का मुद्दा भी जोरदार तरीके से रखा। उनका कहना था कि बच्चे की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।
पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि राघव चड्ढा जिन मुद्दों पर सदन में बोलने वाले होते थे, उसकी जानकारी पहले से पार्टी नेतृत्व को नहीं देते थे। ऐसे में यह कदम संगठनात्मक अनुशासन के तहत लिया गया माना जा रहा है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद पार्टी और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी को लेकर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं।

