Author: Jansarokar News Desk

सोनम वांगचुक का वर्ष 2025 संघर्ष, आंदोलन और पहचान से भरा रहा. लद्दाख के राज्य दर्जे और छठी अनुसूची की मांग, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और टाइम सौ सम्मान-इन सबने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया.

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आमोद कंठ एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने पुलिस सेवा के बाद सामाजिक न्याय, बच्चों के अधिकार, महिला सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम किया है. वे प्रयास जैसे संगठनों से जुड़कर संकटग्रस्त बच्चों और कमजोर समुदायों के लिए काम करने वाले राष्ट्रव्यापी अभियानों से जुड़े रहे हैं.

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पुष्पम प्रिया चौधरी बिहार की एक युवा राजनीतिक नेता, नवाचारवादी और The Plurals Party (टीपीपी/Plurals) की संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं.

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राजेश टंडन भागीदारी अनुसंधान, लोकतांत्रिक शासन, नागरिक समाज और वयस्क शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त चिंतक, शिक्षक और प्रैक्टिशनर हैं. उन्हें विशेष रूप से ज्ञान के लोकतंत्रीकरण और समुदाय-आधारित अनुसंधान को सशक्त करने के लिए जाना जाता है.

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‘समानता की हर कहानी में छिपी है जेंडर की कहानी’ फेमिनिस्ट रिसर्चर और शांति एक्टिविस्ट कीर्ति जयकुमार का मानना है कि दुनिया में मौजूद हर असमानता की जड़ लैंगिक असमानता है.

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डॉ. प्रभात कुमार का जन्म मेदिनीनगर उर्फ़ डाल्टनगंज में 19/01/1962 को हुआ. पलामू जिले के पांडु प्रखंड से इनके पूर्वज ताल्लुक़ रखते हैं. उनके पिताजी स्वर्गीय शिव कुमार प्रख्यात शिक्षाविद रहे.स्वर्गीय किरण बाला स्नेहमई माता आजीवन समाज की सेवा करती रहीं. पिताजी शिक्षक और डॉ प्रभात जी के 11+2 स्कूल के प्राचार्य भी रहे. उनके पिताजी क्लास 11 तक सभी विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षक थे. उनके अलावा अन्य आदरणीय शिक्षकों ने उन्हें पढ़ाया.

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Naam Foundation की स्थापना : नाना पाटेकर ने 2015 में अपने साथी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर यह फाउंडेशन शुरू किया, जिसका उद्देश्य सूखा-ग्रस्त, कर्ज-बैकवरी और संकट में फंसे किसानों की मदद करना है. कर्ज़ व सूखा प्रभावित किसानों की तत्काल मदद : 2015 में, महाराष्ट्र के विडर्भा और मराठवाड़ा क्षेत्रों में आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों को उन्होंने सीधे चेक बांटे. उदाहरण स्वरूप, विडर्भा के 62 परिवारों और लातूर-उस्मानाबाद के 113 परिवारों को ₹15,000 प्रति परिवार मदद दी गई.

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक हैं. वे भारत के प्रमुख वैचारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक नेतृत्वकर्ताओं में गिने जाते हैं. उनका कार्य भारतीय समाज में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर केंद्रित रहा है. आरएसएस की वैचारिक दिशा और संगठनात्मक मार्गदर्शन देशभर में स्वयंसेवकों को सामाजिक सेवा के लिए प्रेरित करना समाज में राष्ट्रभाव, अनुशासन और सेवा संस्कार को मजबूत करना

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कविता बुंदेलखंडी ‘ख़बर लहरिया’ से 2002 से जुड़ी हुईं हैं… आज वे इस अखबार की एडिटर हैं- जो देश का एकमात्र मीडिया संगठन है जिसे पूरी तरह ग्रामीण महिलाओं द्वारा चलाया जाता है. अख़बार की शुरुआत बुंदेलखंड के चित्रकूट जैसे पिछड़े इलाके से हुई. उद्देश्य: गांवों की ख़बरों क​को पहुंचा देना और उनकी समस्याओं को देश तक पहुंचाना. महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और ग्रामीण भारत के मुद्दों को लगभग नज़रअंदाज़ किया जाता है.

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हिंदी साहित्य व भारतीय पत्रकारिता के ​​​​शिखर ​हस्ताक्षर और मार्गदर्शक अ​भिभावक आदरणीय कमलेश्वर जी को जन सरोकार टीम की तरफ से जन्मदिन के मौके पर याद करते हुए हमसब उन्हें मिस कर रहे हैं।

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